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Monday, 21 March 2011
Wednesday, 16 March 2011
जापान का ये जलजला
तबाही के इस मंजर ने ना जाने कितनो का बसेरा छीना ।
माँ को बेटे से ,तो पिता को बेटी से छीना।।
लाशो के इस मंजर में कौन किसपर लिपट कर सोया होगा ।
बैचेन और तड़पती आँखे वहां अपनो को ढंढती होगी।।
गम आँसू , रूदन का ही वहां बज़ार लगा होगा ।
कोई खुदा की मर्जी तो कोई लौटने का दिलसा देता होगा।।
दुनिया इस मंजर को भयंकर त्रासदी का नाम देंगी ।
नई पीढियों को इसकी कहानियां सुनाई देंगी।।
मौत का ये मंजर अब इतिहास के पन्नो में समां जायेंगी।
वक्त का चादर इसे भूला देने को मजबूर करेंगा ।।
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