Wednesday, 16 March 2011

जापान का ये जलजला




तबाही के इस मंजर ने ना जाने कितनो का बसेरा छीना ।
माँ को बेटे से ,तो पिता को बेटी से छीना।।

लाशो के इस मंजर में कौन किसपर लिपट कर सोया होगा ।
बैचेन और तड़पती आँखे वहां अपनो को ढंढती होगी।।

गम आँसू , रूदन का ही वहां बज़ार लगा होगा ।
कोई खुदा की मर्जी तो कोई लौटने का दिलसा देता होगा।।

दुनिया इस मंजर को भयंकर त्रासदी का नाम देंगी ।
नई पीढियों को इसकी कहानियां सुनाई देंगी।।

मौत का ये मंजर अब इतिहास के पन्नो में समां जायेंगी।
वक्त का चादर इसे भूला देने को मजबूर करेंगा ।।

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