मुझे याद है , काले धन की बात मैं पिछले एक दशक के ज्यादा वक्त से सुन रहा हूं। मेरे कान इसकी चर्चाए सुनते सुनते पक गये है। छोट था तो अकसर बड़े बुजर्गो की जुबान पर ये बात चढी रहती थी कि स्विस बैंको में हमारे बाबुओ,हुक्मरानो और उनके अलमबरदारो का इतना पैसा जमा है जिससे कई महीनो तक पूरे भारत के लोगो को खिलया जा सकता है। रह रह कर न जाने इसे लाने की कितनी मुहीम और उम्मीद की मशाले जलाई गई और न जाने कितनी सियासी रंग चढे ।एकबार फिर इसे लेकर चर्चाओ का बाज़र गर्म है, हमारी हूकुमते इस काली कमाई को लाने की बात कह रही है। लेकिन सीधा सा सवाल है कि क्या विदेशी बैंको में जमा ये काला धन वापस आयेगा।यह फिर हर बार की तरह इसका शोर थम जायेंगा। हमारी आजादी के छह दशक गुज़र जाने के बाद भी अंकूत संपती की चाह मे भ्रष्टाचार की ये गंगा लगातार मैली ही होती जा रही है। ईमानदारी से कहा जाए तो इसकी सफाई करने की जहमत अभी तक किसी भी पार्टी ने नहीं दिखाई है।यह मुद्दा आज भी कूड़ा करकट ही बना हुआ है। हां नेताओ के थोथे वादे, फिजूल की बयानबाजी और वोट की सियासी खेल इस मुद्दे को लेकर आज भी जारी है। इस अंधियाले में उम्मीद की लौ जलाना बेमानी लगने लगी है। मुझे याद है बीजेपी के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार लालकष्ण आडवाणी ने काले धन के इस मुद्दे को जोर शोर से उठाया था। पर वे ये क्यों भूल गये कि केंद्र में उनकी भी सरकार काबिज रही थी, उस वक्त उन्हें ये बाते क्यों याद नहीं आई। खैर इनकी बात छोड़िए दिल्ली के सत्ता में काबिज कांग्रेस पार्टी ने ही अभी तक क्या किया? आखिर वो इस मसले पर क्यों खुलकर नहीं बोल रही है? बिल्कुल उनकी ये चुप्पी शंका पैदा करती है। ये सत्तानायक शायद ये भूल रहे है कि दिल्ली की सियासी गलियारो से दूर , देश के दूर दराज के इलाको में बसा अवाम उनकी सारी हरकतो पर अब नज़र बनाये हुए है। वो सबकुछ देख सुन रहा है, उनका दिल और दिमाग पहले की तुलना में अब कही ज्यादा सक्रिय़ है। जो अभी सब्र बांधे हुए है। इसका माकूल जवाब देने के लिए वो वक्त का इंतज़ार कर रहा है। हम सभी को मालूम है कि रावण , कंस , हिरणाकश्यप पर जब अकूत सपति, लालच और अंहकार का नशा चढा था तो उसका क्या हश्र हुआ हुआ ।बताने की शायद ज़रूरत पड़े। उनके सम्राज्य को अस्त होते सूरज को कोई नहीं बचा पाया। उनकी ये त्रासदी इतिहास का हिस्सा बन गई। हमारे सत्तानायको , हुक्मरानो, सियासतदारो को इस अतीती के किस्से से सबक लेने की ज़रूरत है। नहीं तो एक दिन उन्हें भी लालच लील जायेंगा।

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